लाही (Aphid) के लिए सबसे सस्ती और सबसे असरदार दवा – किसान भाइयों के लिए पूरी जानकारी
🌱 लाही (Aphid) क्या होता है?
लाही एक छोटा, नरम शरीर वाला कीट होता है जो फसलों के कोमल पत्तों, टहनियों और कलियों से रस चूसता है। यह बहुत तेजी से फैलता है और थोड़े समय में पूरी फसल को नुकसान पहुँचा सकता है। सब्ज़ी, दाल, तिलहन, सरसों, मिर्च, बैंगन, टमाटर आदि फसलों में लाही का प्रकोप ज़्यादा देखा जाता है।
🖼️ चित्र: पत्ते पर लगा लाही कीट
❌ लाही से होने वाले नुकसान
- पत्ते मुड़ जाते हैं और पीले पड़ने लगते हैं
- पौधे की बढ़वार रुक जाती है
- फूल और फल झड़ने लगते हैं
- पत्तों पर चिपचिपा पदार्थ (हनीड्यू) आ जाता है
- पैदावार और गुणवत्ता दोनों में भारी कमी
💊 लाही के लिए सबसे सस्ती और असरदार दवा
👉 इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL
यह दवा लाही के लिए सबसे ज़्यादा इस्तेमाल की जाने वाली, सस्ती और भरोसेमंद दवा मानी जाती है।
खुराक (Dose):
- 0.3 मिली दवा प्रति लीटर पानी
- एक एकड़ के लिए लगभग 80–100 मिली दवा
छिड़काव का तरीका:
- सुबह या शाम के समय छिड़काव करें
- पत्तों की निचली सतह पर दवा ज़रूर पहुँचे
🌿 बहुत सस्ता देसी उपाय (जैविक किसान के लिए)
👉 नीम तेल (Neem Oil)
अगर किसान रासायनिक दवा नहीं डालना चाहते, तो नीम तेल सबसे अच्छा विकल्प है।
खुराक:
- 3–5 मिली नीम तेल प्रति लीटर पानी
- साथ में 1 मिली लिक्विड साबुन मिलाएँ
फायदे:
- लाही का प्रकोप धीरे-धीरे खत्म होता है
- फसल और मिट्टी दोनों सुरक्षित रहते हैं
⏰ छिड़काव कब करें?
- लाही दिखते ही तुरंत छिड़काव करें
- ज़्यादा प्रकोप होने पर 7–10 दिन बाद दोबारा स्प्रे करें
✅ किसान भाइयों के लिए जरूरी सलाह
- दवा हमेशा सही मात्रा में ही डालें
- एक ही दवा बार-बार न डालें
- स्प्रे करते समय दस्ताने और मास्क पहनें
- तेज धूप या बारिश में छिड़काव न करें
📌 निष्कर्ष
अगर आप सस्ती, आसान और असरदार दवा चाहते हैं तो इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL लाही के लिए सबसे अच्छा विकल्प है। और जो किसान जैविक खेती करते हैं उनके लिए नीम तेल सबसे सुरक्षित उपाय है। समय पर छिड़काव करके आप अपनी फसल को भारी नुकसान से बचा सकते हैं।
🙏 यह जानकारी ज़्यादा से ज़्यादा किसान भाइयों तक ज़रूर पहुँचाएँ ताकि सभी को लाभ हो।